आचार्य का संदेश

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एक योग्य विधार्थी ही सही अर्थो में भविष्य में प्रत्येक कार्य व् पद को सफलतापूर्वक निभा सकता है | प्रश्न यह है की योग्य विधार्थी बनाने के लिए शिक्षक व अभिभावक को क्या करना चाहिए | प्रथमावस्था में माता-पिता व् द्रितियावस्था में शिक्षक का कार्य होता है | वर्तमान में उच्च शिक्षा प्राप्त करना आम विधार्थियों के लिए दुर्लभ होता जा रहा है | जब की उच्च शिक्षा के अभाव में वैश्विक ज्ञान से वंचित होना पड़ेगा |


जैसा की जाना जाता है की योग्य विधार्थी के लिए समय का पालन अनुशासन, कड़ी महेनत , संस्कार आदि होना आवश्यक है| वही कार्य पूरा नही होता है | सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की विधार्थियों को प्रोत्साहित कैसे किया जाय ? तथा जिज्ञासु कैसे बताया जाय? हम सभी ईश्वर के अंश है| अत: माता-पिता की बच्चो के प्रति देख-रेख की पूर्वजिम्मेदारी बनती है तथा शिक्षक को शिष्य के प्रति समर्पित होने की आवश्यकता अहि | तब जाकर योग्य विधार्थी का निर्माण होगा |


योग्य विधार्थी ही समाज को नयी रह दिखा सकता है | अथवा शब्द का निर्माण कर सकता है | सृष्टि की संरचना अद्भुत है वही जीवन पृथ्वी पर सौगात के रूप में मिला है | स्वच्छता, स्वास्थ्य व् शिक्षा के समन्वय के बिना सफल जीवन की कल्पना ही नही की जा सकती है |


विधालय मंदिर है तो विधार्थी राष्ट्र का भविष्य | उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर विधालय विधार्थियों के अन्दर चुपी प्रतिमा को उजागर करने के लिए दृढ़ संकलिप्त है |


आचार्य
आर. बी. सिंह




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